वर्तमान रबी सीजन में गेहूँ की खेती करने वाले लगभग सत्तर प्रतिशत किसान अपने खेतों में एक विशेष प्रकार की समस्या का सामना कर रहे हैं। गेहूँ की पत्तियों पर छोटे-छोटे सफेद धब्बे, डॉट्स के निशान या फिर पत्तियों के भीतर हवा भरे होने जैसे बुलबुले दिखाई दे रहे हैं। कई बार ऐसा प्रतीत होता है कि पत्तियों में एक तरफ गड्ढे बन गए हैं। शुरुआती जांच में किसान इसे किसी कीट का हमला या फफूंद जनित बीमारी समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में यह किसी बीमारी के लक्षण नहीं बल्कि मिट्टी में ‘बोरोन’ नामक सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी का संकेत है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि समय रहते इन लक्षणों को पहचान कर उपचार नहीं किया गया, तो फसल की वृद्धि और गुणवत्ता पर इसका गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
बोरोन गेहूँ की फसल के लिए एक अनिवार्य सूक्ष्म पोषक तत्व है जो पौधों में कोशिका विभाजन और प्रजनन प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर गेहूँ की बालियां पूरी तरह विकसित नहीं हो पातीं और उनका आकार छोटा रह जाता है। सबसे बड़ी समस्या दानों के भराव के समय आती है, जहाँ बोरोन की कमी के कारण दानों की संख्या कम हो जाती है और दाने पिचके हुए या छोटे रह जाते हैं। इसके अलावा, दानों की चमक और वजन में भी भारी गिरावट आती है, जिससे बाजार में किसानों को फसल का सही दाम नहीं मिल पाता। बोरोन की कमी का अर्थ है कि पौधा अन्य उर्वरकों का भी पूर्ण उपयोग नहीं कर पाएगा, जिससे अंततः कुल पैदावार कम हो जाएगी।
इस समस्या के समाधान के लिए बाजार में उपलब्ध बीस प्रतिशत वाले बोरोन का स्प्रे करना सबसे प्रभावी माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, छिड़काव के दौरान मात्रा यानी डोज का विशेष ध्यान रखना चाहिए। यदि किसान केवल बोरोन का छिड़काव कर रहे हैं, तो प्रति लीटर पानी में डेढ़ ग्राम बोरोन मिलाना चाहिए, यानी सौ लीटर पानी में एक सौ पचास ग्राम बोरोन पर्याप्त है। हालांकि, यदि बोरोन को किसी अन्य खाद के साथ मिलाकर स्प्रे किया जा रहा है, तो इसकी मात्रा घटाकर सौ ग्राम प्रति सौ लीटर पानी कर देनी चाहिए। ध्यान रखने वाली बात यह है कि बोरोन की अधिक मात्रा पत्तियों को जला सकती है, इसलिए निर्धारित डोज से अधिक का प्रयोग करने से बचना चाहिए और छिड़काव के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी का उपयोग करना चाहिए।
गन्ने और गेहूँ जैसी फसलों में बेहतर परिणामों के लिए बोरोन को एनपीके (NPK) उर्वरकों के साथ मिलाकर इस्तेमाल करना अधिक लाभदायक सिद्ध होता है। यदि फसल में हल्का पीलापन है या बढ़वार कम है, तो एनपीके उन्नीस-उन्नीस-उन्नीस के साथ बोरोन का प्रयोग करना चाहिए। वहीं, यदि फसल की बढ़वार अच्छी है और वह गभोट (बालियां निकलने की स्थिति) अवस्था के करीब है, तो एनपीके शून्य-बावन-चौंतीस के साथ बोरोन मिलाकर स्प्रे करना चमत्कारिक परिणाम देता है। इस संयोजन से न केवल पत्तियों के धब्बे गायब हो जाते हैं, बल्कि बालियां लंबी आती हैं और दानों में विशेष चमक व वजन बढ़ता है। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे सुबह या शाम के समय ही छिड़काव करें ताकि पौधों को पोषक तत्वों का अधिकतम लाभ मिल सके।