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नये साल का आगाज: १ जनवरी २०२६ की मुख्य सुर्खियां और बड़े बदलाव
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मानसून २०२६ का पूर्वानुमान: अल नीनो के बढ़ते खतरे के बीच सूखे की आशंका

 

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प्रशांत महासागर में हलचल: ला-नीना की विदाई और अल-नीनो का उदय

भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले मानसून को लेकर वर्ष 2026 के लिए शुरुआती पूर्वानुमान चिंताजनक संकेत दे रहे हैं। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, वर्तमान में सक्रिय ‘ला-नीना’ (La Niña), जो भारत में प्रचुर वर्षा का कारक माना जाता है, वह फरवरी 2026 तक समाप्त हो जाएगा। इसके बाद मार्च से मई के दौरान प्रशांत महासागर ‘तटस्थ’ (Neutral) स्थिति में रहेगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मौसम मॉडलों (ECMWF और ऑस्ट्रेलियाई मॉडल) के डेटा विश्लेषण से यह स्पष्ट हो रहा है कि जून 2026 से प्रशांत महासागर के ‘नीनो 3.4’ इंडेक्स में तापमान तेजी से बढ़ना शुरू होगा। तापमान में यह वृद्धि ‘अल-नीनो’ (El Niño) के आगमन का संकेत है, जो मानसून के दूसरे भाग (जुलाई-सितंबर) में भारत के लिए सूखे जैसी स्थिति पैदा कर सकता है।

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