ज्योतिषीय और धार्मिक दृष्टिकोण से वर्ष 2026 एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दुर्लभ वर्ष होने जा रहा है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार भले ही साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन हिंदू पंचांग (विक्रम संवत 2083) के अनुसार इस बार साल में कुल 13 महीने होंगे। इसका मुख्य कारण साल 2026 में लगने वाला ‘अधिक मास’ है, जिसे आम भाषा में ‘मलमास’ या ‘पुरुषोत्तम मास’ भी कहा जाता है। इस विशेष खगोलीय स्थिति के कारण साल 2026 में ज्येष्ठ का महीना दो बार आएगा, जिससे वर्ष की अवधि बढ़ जाएगी।
ज्योतिष शास्त्र और खगोल विज्ञान के अनुसार, अधिक मास पड़ने का एक ठोस वैज्ञानिक आधार है। दरअसल, सूर्य वर्ष (Solar Year) 365 दिन और लगभग 6 घंटे का होता है, जबकि चंद्र वर्ष (Lunar Year) 354 दिनों का होता है। इन दोनों वर्षों के बीच प्रति वर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर आता है। इस अंतर को संतुलित करने और ऋतुओं के चक्र को पंचांग के साथ तालमेल बिठाने के लिए हर 3 साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसी गणितीय गणना के परिणामस्वरूप साल 2026 में अधिक मास का योग बन रहा है, जो 17 मई 2026 से शुरू होकर 15 जून 2026 तक चलेगा। इस दौरान ज्येष्ठ का महीना लगभग 59 दिनों का होगा।












