सब्सिडी गणना के पुराने सिस्टम में बदलाव की तैयारी
भारत सरकार रसोई गैस (LPG) पर दी जाने वाली सब्सिडी के मौजूदा सिस्टम में एक बड़ा बदलाव करने की योजना बना रही है। अब तक भारत में एलपीजी सब्सिडी की गणना ‘सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ (Saudi CP) के आधार पर की जाती रही है, जो पश्चिम एशिया से आने वाली गैस के लिए एक मानक (Benchmark) है। हालांकि, अब भारतीय तेल कंपनियां अपनी निर्भरता केवल सऊदी अरब पर न रखकर अमेरिका से भी बड़े स्तर पर एलपीजी खरीदने की तैयारी कर रही हैं। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार अब सब्सिडी के इस पुराने फॉर्मूले को बदलने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है, जिसका सीधा असर करोड़ों उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
अमेरिकी आयात और फ्रेट चार्ज का नया पेंच
हाल ही में इंडियन ऑयल (IOC), बीपीसीएल (BPCL) और एचपीसीएल (HPCL) जैसी दिग्गज सरकारी तेल कंपनियों ने अमेरिकी निर्यातकों के साथ सालाना सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं। यह अनुबंध लगभग 2.2 MMTPA एलपीजी के लिए है, जो भारत के कुल वार्षिक आयात का करीब 10% हिस्सा है। समस्या यह है कि अमेरिका से गैस लाने में लगने वाला ‘फ्रेट चार्ज’ (शिपिंग और परिवहन लागत) सऊदी अरब के मुकाबले काफी अधिक होता है। तेल कंपनियों की मांग है कि सब्सिडी के नए फॉर्मूले में अमेरिकी बेंचमार्क कीमतों और इस भारी-भरकम परिवहन खर्च को भी शामिल किया जाए। अमेरिका से एलपीजी तभी सस्ती पड़ती है जब वह सऊदी की तुलना में भारी डिस्काउंट पर मिले।









